Tuesday, August 20, 2019

भारत में पैदा होते तो स्टीफन हॉकिंग करते ये काम!

"मैं उनसे तर्क करती थी कि आपको हम में से एक को चुना होगा. आप दोनों के साथ नहीं रह सकते. हम बहुत ईमानदार और बेबाक बहस करते थे नैतिकता और परिवार के प्रति उत्तरदायित्व के बारे में. अगर परिवार एक तरफ़ हो और प्यार दूसरी तरफ़ हो तो हमें किसका त्याग करना चाहिए. और अगर त्याग न करें और इससे सब लोगों को तकलीफ़ हो तो क्या ये जायज़ है."
विक्रम साराबाई लकीर के फ़कीर नहीं थे और हर विषय पर उनकी सोच अलग रहती थी. अमृता शाह बताती हैं, "वो खुले दिमाग के व्यक्ति थे. उनके विचारों का दायरा बहुत बड़ा था. दोनों ने अपने सम्बन्धों को छिपाने की कभी कोशिश नहीं की लेकिन इस दौरान उनका अपनी पत्नी से प्यार कभी कम
वो उनको पहले की तरह चाहते रहे मगर साथ ही कमला के साथ खुले सम्बन्धों के बावजूद उनकी पत्नी से उस तरह की तीव्र प्रतिक्रिया नहीं आई जो कि इस तरह के मामलों में आती है, ख़ासकर ये देखते हुए कि मृणालिनी अपने ज़माने में बहुत बेबाक और मुंहफट महिला मानी जाती थीं."
कलाम लिखते हैं, "कॉफ़ी के बाद डॉक्टर साराभाई ने हम दोनों को रॉकेट असिस्टेड टेक ऑफ़ यानि RATO की अपनी योजना समझाई. उन्होंने कहा कि इसकी मदद से भारतीय युद्धक विमान हिमालय में छोटे रनवे से भी टेक-ऑफ़ करने में सक्षम होंगे."
"थोड़ी देर बाद उन्होंने हमदो नों को कार में बैठने के लिए कहा. वो हमें अपने साथ फ़रीदाबाद की तिलपत रेंज ले गए. फिर उन्होंने हम दोनों से एक गुरु की तरह पूछा, अगर मैं तुम्हें शोध के लिए एक राकेट उपलब्ध करा दूँ, तो क्या तुम 18 महीनों के दर उसका स्वदेशी संस्करण बना कर हमारे एचएफ़- 24 विमान पर फ़िट कर पाओगे ? हम दोनों ने एक साथ कहा, "ये संभव है." यह सुनते ही उनकी बांछें खिल गईं. उन्होंने अपनी कार से हम दोनों को वापस अशोका होटल ड्रॉप किया और वो प्रधानमंत्री से नाश्ते पर मिलने उनके निवास स्थान चले गए."
नहीं हुआ.
1966 में जब होमी भाभा की अचानक विमान दुर्घटना में मौत हो गई तब लविक्रम साराभाई को उनकी जगह परमाणु ऊर्जा आयोग का अध्यक्ष बनाया गया. हांलाकि उनकी परमाणु शोध की कोई पृष्ठभूमि नहीं थी.
अमृता शाह बताती हैं, "भाभा का जो व्यक्तित्व था और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय के साथ उनका जो सम्बन्ध था, उसे देखते हुए उनके उत्तराधिकारी को उनके क़द के समकक्ष होना चाहिए था. कुछ लोगों को इस पद की पेशकश की गई, लेकिन बात बनी नहीं. इसके बाद साराभाई से ये पद संभालने के लिए कहा गया. वो पहले से भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम चला रहे थे. इसके सा
"दूसरी बात ये थी कि साराभाई ने ही अंतरिक्ष कार्यक्रम की नींव रखी थी और उनकी टीम शुरू से ही उनके साथ काम कर रही थी. लेकिन परमाणु कार्यक्रम की टीम पहले से तैयार थी. इसलिए जब एक बाहरी व्यक्ति उस विभाग के प्रमुख के तौर पर आया तो कुछ लोगों ने उसे पसंद नहीं किया, जिसमें भाभा आणविक रिसर्च सेंटर के प्रमुख होमी सेठना प्रमुख थे. लेकिन राजा रामन्ना का मानना था कि उस समय इस पद के लिए साराभाई के स्तर के ही शख़्स की ज़रूरत थी."
विक्रम साराभाई भारत के पूर्व राष्ट्रपति और मिसाइल मैन के नाम से मशहूर एपीजे अब्दुल कलाम के गुरु थे. एक बार कलाम को साराभाई का संदेश मिला कि वो उनसे दिल्ली में मिलना चाहते हैं. कलाम कई फ़्लाइट्स बदल कर दिल्ली पहुंचे. साराभाई ने उन्हें सुबह साढ़े तीन बजे मिलने का समय दिया.
कलाम अपनी आत्मकथा 'विंग्स ऑफ़ फ़ायर' में लिखते हैं, "मैं परेशान था कि मैं इतनी सुबह अशोका होटल कैसे पहुंचूँगा. इसलिए मैंने होटल की लॉबी में ही रात बिताने का फ़ैसला किया. होटल का खाना खाना मेरी जेब पर भारी पड़ता, इसलिए मैंने एक ढाबे में खाना खाया और रात 11 बजे फिर लॉबी में पहुंच गया."
"तीन बजे के आसपास वहां एक और शख़्स आ कर बैठ गए. उन्होंने सूट पर एक धारीदार टाई बाँध रखी थी और उनके जूते चमक रहे थे. ठीक साढ़े तीन बजे हम दोनों को साराभाई के कमरे में ले जाया गया. साराभाई ने हमरा स्वागत करते हुए हमारा एक दूसरे से परिचय करवाया, कलाम अंतरिक्ष विभाग में मेरे साथी हैं और ये हैं ग्रुप कैप्टेन नारायणन जो वायुसेना मुख्यालय में काम करते हैं."
थ परमाणु विभाग की ज़िम्मेदारी लेना बहुत कठिन काम था."

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